अगर आप प्रेम में हैं तो मत देखिए सैराट

अगर आप प्रेम में हैं तो मत देखिए सैराट । अगर आपने यह फिल्म देख लेंगे तो हो सकता है कि आप बीमार , बहुत बीमार हो जाएँ । या ये भी हो सकता है कि आपका दिल , दिमाग काम ना करें । आप डिप्रेशन में जा सकते हैं । एक भयानक डर आपके अन्दर घर कर सकता है । शायद कुछ पल आप किसी से बात करने की स्थिति में भी ना रहें । या अगर आप मेरी तरह प्रेम में न है तो फिल्म देखने पर हो सकता है आपका मन एक कोने में जा फूट-फूट कर रोने को करें । रोते रोते आपकी आँखे लाल हो सकती है । गला फंस सकता है । आवाज भारी हो जायेगा ।
                                     
                                इस साल के शुरुआत में रिलीज हुई मराठी फिल्म है सैराट । लेकिन यकीन मानिये ज़रा सा भी आपको नहीं लगेगा की फिल्म हिंदी की नहीं है । फिल्म की कहानी हम सब को पता है । एक गरीब, लोअर कास्ट लड़का और एक अमीर , अप्पर कास्ट लड़की । दोनों का प्यार । फिर परिवार का झगडा , मारपीट । लड़का-लड़की का घर से भाग जाना । नया जीवन बसाना । और फिर ऑनर किल्लिंग । कहानी खत्म । कोई अनटोल्ड स्टोरी नहीं । लेकिन फिर भी मराठी फिल्म के इतिहास की सबसे कामयाब फिल्म बन गयी । 100 करोड़ की कमाई । वजह है कहानी को कहने का तरीका । एकदम फ्रेश । दिल को छु लेने वाला । कहानी ऐसी जैसा लगता है अरे यार इस कहानी का एक पार्ट तो हम भी हैं । वो वाला करेक्टर तो मेरा है । यह वाला सीन तो मेरा साथ भी हो चुका है । लड़की को दूर खड़े हो देखना । क्लास में नज़र से नज़र मिलाना । प्रेम पत्र वाला चैप्टर । छिप कर मंदिर में मिलना। बाज़ार में लड़की का पीछा करना । मोबाइल पे घंटो बात करना । फेसबुक पर लड़की को ढूँढना , लड़की के भाई से झगड़ा । ये सब ऐसे चैप्टर हैं जो आउट ऑफ़ सिलेबस होते हुए भी लड़के डिस्टिंक्शन से पास हुए हैं । तभी तो जब ये सारे सिन फिल्म में आते हैं तो लगता है की फिल्म में एक्टिंग तो हम कर रहे हैं ।

फिल्म का हीरो परश्या एक लोअर कास्ट लड़का है। पढ़ाई में अच्छा है । गाँव के क्रिकेट टीम का कप्तान । कविता लिखना शौक है उसे । पिताजी मछली पकड़ने का काम करते हैं जिसमे परश्या भी सहयोग करता है । उसके दो दोस्त हैं । एक सलया जो मोटर मकेनिक । दूसरा दोस्त है बलया । बलया की माँ चूड़ी बेचती है । बलया लंगड़ा है । उसका पैर मुड़े हुआ हैं । दोनों परश्या का हर पल का साथी है । फिल्म की नायकी आर्ची अपर कास्ट अमीर लड़की है । आर्ची एकदम बोल्ड अंदाज वाली लड़की है । उसे बुलेट चलाना पसंद है । इसके पिता इलाके के पावरफुल आदमी हैं।

                                      परश्या और आर्ची एक ही गाँव के हैं । दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं । दोनों को प्यार हो जाता है । कुछ दिन बाद यह बात आर्ची के परिवार को पता चलता है । परश्या की आर्ची के पिता के आदमी जम के धुनाई करते हैं और गाँव से चले जाने को कहते हैं। परश्या का पिता उसे अपने रिश्तेदार यहाँ छोड़ आता हैं । इधर आर्ची की जबर्दस्ती शादी की जाने लगती है । आर्ची भाग कर परश्या के यहाँ चली जाती हैं । आर्ची के परिवार वाले खोजते हैं दोनों को । इधर उधर भागते दोनों हैदराबाद पहुँचते हैं । जहाँ दोनों शादी कर नये सिरे से जीवन की शुरुआत करते हैं।  परश्या और आर्ची खुशहाल जीवन बिताने लगते हैं । परश्या एक बेटे का पिता बनता है। आर्ची अपने मां को बेटा होने की बात बताती हैं । आर्ची की माँ अपने बेटी और अपने नाती के लिए कपडे और तोहफा भेजती है। तोहफा लेकर आर्ची का भाई और उसके कुछ रिश्तेदार जाते हैं । आर्ची और परश्या को लगता है की अब सब ठीक हो जायेगा । लेकिन आर्ची के भाई और रिश्तेदार परश्या और आर्ची ही हत्या कर देते हैं ।
              अंत का दृश इतना भावुक कर देता है की फिल्म खत्म होने पर भी हम स्क्रीन को देखते रह जाते हैं । ना कुछ कहने का मन करता है और न सुनने का । बस जी भर के रोने का मन करता है । आर्ची का बेटा स्क्रीन पर रोते रहता है ।। रोने की आवाज फिल्म में नहीं आती है । वो रोने की आवाज हम सब की होती है । आँखों से आंसू बहते चले जाते हैं ।
                               फिल्म खत्म होने पर सारे लड़के-लडकियाँ आर्ची और परश्या जैसा लगने लग जाते हैं। लगता है फिल्म में ऐसा हो गया है लेकिन वास्तव में हम ये होने नहीं देंगे । उन्हें अपने मर्ज़ी से जीने का पूरा हक है । दो प्यार करने वाले की जब हत्या की जाती है तो केवल वो दोनों नहीं मरते । हम मरते हैं । हमारा समाज मरता है । इंसानियत मरता है। और ये हम होने नहीं देंगे ।

                                            *****

1 टिप्पणी: