लघुकथा | पुरस्कार

लघुकथा       

                     पुरस्कार

रंजना आज बहुत खुश थी। उसकी खुशी उसके चेहरे पर साफ दिख रही थी। उसकी खुशी का कारण था कि आज कन्या भ्रूण हत्या रोकने पर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित सेमिनार में उसने एक बेहतरीन भाषण दिया। उसके भाषण का जिलापदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारी से खूब तारीफ मिली। जिलापदाधिकारी की ओर से पुरस्कार में एक ट्राफी भी मिली थी।            घर जाकर उसने यह ट्राफी अपने पति रमेश व पुत्रों अरूण और वरूण को दिखाई। उसके घर में खुशी का माहौल था। पूरा परिवार रंजना की तारीफ कर रहा था।            रंजना सरकारी हाई स्कूल में हिन्दी की अध्यापिका है। उसके पति डी.ई.ओ कार्यालय में निम्न पद पर कार्यरत हैं। उसका बड़ा पुत्र अरूण ग्यारहवी और छोटा पुत्रा वरूण नवमी का छात्र है।उसी दिन शाम को उसके मायके से उसके माँ का फोन आया। उसकी माँ ने उसे कहा कि उसके सँझले भाई की पत्नी विमला की भ्रूण जाँच करवानी है।            रंजना को डॉक्टरों से अच्छी जान पहचान थी। वह डॉक्टरों से कम पैसे में ही जाँच करा देती। अगले दिन रंजना विमला के साथ महिला डॉक्टर  यहाँ गई। डॉ. आरती और रंजना में अच्छी जान पहचान थी। डॉक्टर ने विमला के भ्रूण की जाँच की। जाँच के बाद मालूम पड़ा कि विमला के गर्भ में कन्या भ्रूण बढ़ रही है। यह जानते ही विमला रोने लगी। उसे पहले से ही पुत्र प्राप्ति की बेहद ईच्छा थी। लेकिन इस बार भी उसे निराशा हाथ लगी।            रंजना ने विमला से कहा कि लड़की पालना कठिन काम है। उसे पढ़ाएँ-लिखाएँ फिर दहेज देकर उसकी शादी करे। फिर भी ससुराल में प्रताड़ना ही मिलती है।            रंजना के समझाने पर विमला भ्रूण हत्या करने को तैयार हो गई। अगले ही दिन डॉक्टर आरती ने उस मादा भ्रूण को समय से पहले  ही मार दिया । डॉक्टर आरती ने विमला को दवाई और इंजेक्शन दिया। अगले दिन रंजना विमला को लेकर घर की ओर चल पड़ी। घर जाने पर उसने देखा कि वह ट्राफी उसको मुँह चिढ़ा रहा है।
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