मैं और वह

कविता 
मैं और वह

मेरी ही उम्र का होगा वह
पानी की बोतल से भरे
बाल्टी लिए हुए हाथ में
चला जा रहा था भीड़ भरी ट्रेन में
अपने बोतल बेचने की कोशिश में
अपने बोतल की विशेषता बताते
लोगो के चेहरे को आशा से देखते हुए
बढ़ा जा रहा था
कभी दुत्कार , कभी प्यार पाते हुए
चेहरा असमय बढ़ने की निशानी
कंधे पर परिवार चलाने की जिम्मेवारी
यह समाज उसका विद्यालय
उसके शिक्षक जीवन का यथार्थ
अस्तित्व बचाना उसकी परीक्षा
उसका प्रतिद्वंदी सारा संसार 
और मैं ,वीडियो गेम में
वीलेन को हरा जाते हूं वीर
पर उसने तो जीवन संघर्ष में
बहाए हैं रूधिर
हमारा बड़ा परिवार
दर्जनों दोस्त,सैकड़ो ई फैंड
दुनिया भर में है तार
पर मां दो बहन तक है उसका संसार

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